हर फ़ोन, कार, उपग्रह और बिजली ग्रिड सेमीकंडक्टर चिप पर चलता है। दशकों तक भारत ने अपने इंजीनियरिंग केंद्रों में दुनिया की कई चिप डिज़ाइन कीं, पर अपनी ज़रूरत की लगभग सारी चिप आयात कीं।
अब यह बदलने लगा है। भारतीय प्रयोगशालाओं ने अपने प्रोसेसर बनाए हैं, गुजरात में पहले व्यावसायिक चिप संयंत्रों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, और सितंबर 2026 में सरकार ने अपने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा, बड़ा चरण शुरू किया।
यहाँ जानिए कि भारत ने अब तक क्या बनाया है, और आगे क्या बाक़ी है।
चिप क्यों मायने रखती हैं
चिप सिलिकॉन का एक छोटा टुकड़ा है, जिस पर लाखों या अरबों सूक्ष्म स्विच होते हैं। किसी उपकरण में गणना, भंडारण और नियंत्रण का काम यही हिस्सा करता है।
चिप बनाना उद्योग के सबसे कठिन कामों में से एक है, और इसका उत्पादन दुनिया के कुछ ही स्थानों में केंद्रित है। जब आपूर्ति बाधित होती है, तो हर जगह के कारखानों पर असर पड़ता है।
भारत के लिए देश में ही चिप डिज़ाइन करने और बनाने की क्षमता केवल व्यापार का मामला नहीं है। इसका असर उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम, रक्षा प्रणालियों और तेज़ी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की विश्वसनीयता पर पड़ता है।
Vikram 3201: अंतरिक्ष के लिए बना प्रोसेसर
Vikram 3201 एक 32-bit माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे ISRO ने चंडीगढ़ स्थित सेमीकंडक्टर लैबोरेटरी (SCL) के साथ मिलकर विकसित किया, और इसका निर्माण भी वहीं हुआ।
इसे 2 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में SEMICON India 2025 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया गया, और इसे भारत का पहला पूर्णतः स्वदेशी 32-bit प्रोसेसर बताया गया।
यह फ़ोन या लैपटॉप की चिप नहीं है। इसे रॉकेट एवियोनिक्स के लिए बनाया गया है और इसे −55 °C से +125 °C तक काम करना होता है। अंतरिक्ष में इसका पहला परीक्षण ISRO के PSLV-C60 मिशन पर हुआ, जो SpaDeX डॉकिंग प्रयोग लेकर गया था।
SHAKTI और IRIS: IIT Madras की ओपन-सोर्स चिप
SHAKTI, IIT Madras में डिज़ाइन किए गए प्रोसेसरों का एक परिवार है। यह RISC-V पर आधारित है, जो एक खुला इंस्ट्रक्शन सेट है और जिसे कोई भी किसी विदेशी कंपनी को लाइसेंस शुल्क दिए बिना इस्तेमाल कर सकता है।
फ़रवरी 2025 में IIT Madras और ISRO ने IRIS की घोषणा की, जो अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए SHAKTI पर आधारित 64-bit कंट्रोलर है। इसका निर्माण SCL चंडीगढ़ में हुआ, और पैकेजिंग व असेंबली भारतीय कंपनियों ने की।
IRIS निर्मित होने वाली तीसरी SHAKTI चिप थी; इससे पहले 2018 में RIMO और 2020 में MOUSHIK बनी थीं। यह काम इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की डिजिटल इंडिया RISC-V पहल के तहत वित्तपोषित है।
DHRUV64: C-DAC का 64-bit प्रोसेसर
दिसंबर 2025 में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने DHRUV64 की घोषणा की, जो C-DAC द्वारा विकसित 1.0 GHz पर चलने वाला 64-bit, डुअल-कोर प्रोसेसर है।
यह भी RISC-V पर आधारित है और सरकार के माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम के तहत, C-DAC के VEGA प्रोसेसर परिवार के हिस्से के रूप में बनाया गया। इसे 28 नैनोमीटर प्रक्रिया पर बनाया गया है।
DHRUV64 का लक्ष्य 5G उपकरण, वाहन, औद्योगिक स्वचालन और कनेक्टेड डिवाइस हैं, जहाँ भारतीय कंपनियाँ विदेश से लाइसेंस लेने के बजाय स्वदेशी प्रोसेसर इस्तेमाल कर सकती हैं।
डिज़ाइन से कारखाने तक
चिप डिज़ाइन करना आधी कहानी है। किसी उपकरण में लगने से पहले उसका निर्माण (फ़ैब्रिकेशन) होना चाहिए, फिर असेंबली, परीक्षण और पैकेजिंग।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत सरकार ने 12 चिप निर्माण और पैकेजिंग संयंत्रों को मंज़ूरी दी है। जुलाई 2026 तक इनमें से तीन में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका था।
गुजरात के साणंद में Micron Technology के असेंबली और टेस्ट संयंत्र ने 2026 की शुरुआत में व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया, और फ़रवरी में प्रधानमंत्री ने इसका उद्घाटन किया। साणंद में ही Kaynes Semicon के पैकेजिंग संयंत्र का उद्घाटन 31 मार्च 2026 को हुआ।
सबसे बड़ी परियोजना गुजरात के धोलेरा में Tata Electronics का फ़ैब है, जिसे ताइवान की PSMC के साथ बनाया जा रहा है। इसे भारत का पहला व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फ़ैब बताया जाता है, और इसका लक्ष्य 2026 के अंत तक पहली चिप बनाना है।
Semicon 2.0: अगला चरण
15 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग ₹1.27 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण को मंज़ूरी दी।
पहला चरण मुख्य रूप से कारखानों पर केंद्रित था। दूसरा पूरी शृंखला को शामिल करता है: चिप डिज़ाइन, उपकरण और सामग्री, फ़ैब, असेंबली और पैकेजिंग, अनुसंधान, और इंजीनियरों का प्रशिक्षण।
प्रधानमंत्री ने 17 से 19 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित SEMICON India 2026 में इस नए चरण की औपचारिक शुरुआत की।
यह क्रांति क्या है, और क्या नहीं
यह स्पष्ट समझना उपयोगी है कि भारत कितनी दूर आया है।
भारत की प्रगति अब चिप बनाने के हर चरण तक फैली है:
- चिप डिज़ाइन
- ओपन-सोर्स RISC-V
- अंतरिक्ष-स्तरीय प्रोसेसर
- फ़ैब्रिकेशन
- असेंबली और पैकेजिंग
- इंजीनियरिंग प्रतिभा
अब तक बने प्रोसेसर परिपक्व (पुरानी पीढ़ी की) प्रक्रियाओं पर बने हैं। यह रॉकेट, उपग्रह और औद्योगिक उपकरणों के लिए उपयुक्त है, जहाँ गति से ज़्यादा विश्वसनीयता मायने रखती है। फ़ोन और AI सर्वर की सबसे उन्नत चिप अब भी विदेश में बनती हैं।
भारत पहले भी चिप बना चुका है: SCL चंडीगढ़ दशकों से चिप बनाता आ रहा है। नया है पैमाना: व्यावसायिक संयंत्र, निजी निवेश और स्वदेशी डिज़ाइनों का लगातार सिलसिला।
अधिकांश नए संयंत्र सिलिकॉन खुद बनाने के बजाय चिप की असेंबली और पैकेजिंग करते हैं। धोलेरा फ़ैब चालू होने पर असली परीक्षा होगी।
चिप छोटी होती है। उसे बनाने की क्षमता छोटी नहीं। भारत यह क्षमता एक-एक कदम करके बना रहा है।
स्रोत और आगे पढ़ें
- PIB: यशोभूमि, नई दिल्ली में SEMICON India 2026, 17–19 सितंबर 2026 — आयोजन, उसकी तिथियों और स्थान की आधिकारिक घोषणा।
- PIB: DHRUV64, भारत का पहला 1.0 GHz, 64-bit डुअल-कोर प्रोसेसर — C-DAC के DHRUV64 और माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम पर आधिकारिक नोट।
- IIT Madras: IIT Madras और ISRO ने SHAKTI-आधारित IRIS चिप विकसित और बूट की — IRIS, उसके साझेदारों और पहले की SHAKTI चिप पर प्रेस विज्ञप्ति।
- Business Standard: Vikram 32-bit प्रोसेसर क्या है? — Vikram 3201, ISRO और SCL पर व्याख्यात्मक लेख।
- Business Standard: मंत्रिमंडल ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मंज़ूरी दी — ₹1.27 लाख करोड़ का परिव्यय, और 12 स्वीकृत संयंत्रों में से तीन में उत्पादन।
- PM India: प्रधानमंत्री ने साणंद में Micron की ATMP सुविधा का उद्घाटन किया — Micron असेंबली और टेस्ट संयंत्र पर आधिकारिक विज्ञप्ति।
- Akashvani News: प्रधानमंत्री ने साणंद में Kaynes Semicon के OSAT संयंत्र का उद्घाटन किया — 31 मार्च 2026 के उद्घाटन की रिपोर्ट।
- Tata group: Tata धोलेरा में देश का पहला फ़ैब बनाएगा — Tata Electronics और PSMC की फ़ैब परियोजना।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन — कार्यक्रम की सरकारी आधिकारिक वेबसाइट।